Seven Sages AIतारों से दोस्ती, अपनों के साथ।परिवार कोना

कहानी 1

ध्रुव तारा

बहुत-बहुत पहले की बात है। इतने पहले की, जब आसमान बिल्कुल खाली था। न चाँद की कहानियाँ थीं, न तारों के नाम। बस दूर-दूर तक गहरा नीला अँधेरा।

उस अँधेरे में एक अकेला तारा चमकता था। सफ़ेद, शांत और अटल। बाकी सब चीज़ें घूमती थीं, बदलती थीं, पर यह तारा कभी अपनी जगह नहीं छोड़ता था। इसीलिए इसका नाम पड़ा ध्रुव तारा, यानी जो कभी न डिगे।

उस तारे में रहते थे ध्रुव बाबा। उनका कोई तय रूप नहीं था। कभी वे रोशनी जैसे दिखते, कभी किसी शांत बुज़ुर्ग जैसे। उनकी सफ़ेद रोशनी में एक राज़ छिपा था: अगर ध्यान से देखो, तो उसमें सातों रंग झिलमिलाते थे।

ध्रुव बाबा रोज़ नीचे धरती को देखते। उन्होंने नदियों को पहाड़ों से उतरते देखा, जंगलों को उगते देखा, बर्फ़ को पिघलते और फूलों को खिलते देखा। मौसम आते, मौसम जाते, पर ध्रुव बाबा धीरज से देखते रहते।

वे कहते, "जो अटल रहता है, वही सबसे दूर तक देख पाता है।"

फिर एक रात कुछ ऐसा हुआ, जो पहले कभी नहीं हुआ था। धरती पर एक नन्ही-सी, गरम रोशनी टिमटिमाई। वह न आग थी, न जुगनू। ध्रुव बाबा ने ध्यान से देखा और उनके चेहरे पर पहली बार एक बड़ी-सी मुस्कान आ गई।

वह रोशनी क्या थी? यह जानेंगे अगली कहानी, "पहली गोद" में।

यह हिस्सा बड़ों के लिए है

आगे बढ़ने के लिए अपने किसी बड़े को बुलाइए और उनसे यह सवाल हल करवाइए।