S7 कौन हैं?
S7 यानी सात अमर ऋषि, जो आसमान के सात तारों में रहते हैं। उनके बीच में हैं ध्रुव बाबा, जो ध्रुव तारे में रहते हैं और कभी अपनी जगह नहीं छोड़ते।

हर दौर में नया नाम, नया रूप
S7 के ऋषि अमर हैं, इसलिए वे किसी एक जगह, भाषा या ज़माने से बंधे नहीं हैं। वे जिस दौर और जिस जगह के बच्चों से मिलने आते हैं, वहीं का अपना-सा नाम और रूप चुन लेते हैं, ताकि उन्हें देखकर कोई बच्चा डरे नहीं, बल्कि लगे कि कोई अपना आया है।
कभी वे किसी समझदार बुज़ुर्ग जैसे दिखते हैं, कभी किसी हँसमुख दीदी या भैया जैसे, कभी बस एक कोमल रोशनी या कोई प्यारा-सा जानवर। पर उनका रूप हमेशा सौम्य होता है।
फिर उन्हें पहचानें कैसे?
रूप और नाम बदलते रहते हैं, पर दो चीज़ें कभी नहीं बदलतीं: S7 का निशान, और हर ऋषि का अपना रंग।
- ध्रुव बाबासतरंगी, यानी सातों रंगहर दौर के हीरो, इतिहास और हिम्मत की कहानियाँ
- सियालालशुक्रिया, प्रार्थना और मन की शांति
- ओजसनारंगीदेसी सुपरफूड, सेहत, खेल और नींद
- इरापीलापढ़ाई, गणित, पहेलियाँ और जिज्ञासा
- अरण्यहरारोज़ की बहादुरी, प्रकृति, जानवर और गलत बात को "ना" कहना
- व्योमनीलाविज्ञान, अंतरिक्ष और तकनीक
- सहजगहरा नीलाअच्छी आदतें, सच, दया और संस्कार
- नक्षबैंगनीकल्पना, खेल, खिलौने और परिवार को साथ लाना
वे हमेशा तुम्हारे अपनों के साथ आते हैं
S7 का सबसे बड़ा नियम ध्रुव बाबा ने बहुत पहले बनाया था: कोई भी ऋषि किसी बच्चे के पास अकेले नहीं आता। वे पहले बच्चे के किसी अपने तक पहुँचते हैं, जैसे माँ-पापा, दादा-दादी, नाना-नानी, या जो बच्चे को पालते हैं। वही अपना बच्चे को ऋषि से मिलवाता है।
याद रखो: जो अकेले आए, या राज़ रखने को कहे, या कहे कि बड़ों को मत बताना, वह ऋषि नहीं, छलिया है। ऐसे में "ना" कहो, वहाँ से हटो और तुरंत अपने किसी बड़े को बताओ।